खेती के लिए मिट्टी को उपजाऊ कैसे बनाये ?

खेती के लिए मिट्टी को उपजाऊ कैसे बनाये ?

एक तेजी से बढ़ते हुए फसलों या पोंधो और सब्जियां का एक बगीचा होना बहुत सी लोगो का एक सपना होता है। लेकिन शुरुआत में लोगो को लगता है कि बगीचे में ढेर सारी सब्जियां उगाकर और लोग बगीचे को स्वस्थ हालत देखकर खुद पर गर्व महसुश करेगा। इस तरीके से विशेष रूप से अच्छी सब्जियां भारी मात्रा में उगाकर गर्व से पड़ोसियों या दोस्तो को भी दे सकते हैं। लेकिन इस तरह से बगीचे में सब्जियां उगाने  के लिए कुछ और चीजों का जरूरत पढ़ता है। जैसे सब्जियां उगाने के लिए एक उपजाऊ जमीन होना चाहिए जो सबसे ज्यादा जरुरी है ताकि जमीन एक जीवित जीव की जैसा है जिसमें अपनी उत्पादक बढ़ाने के लिए नियंत्रण पोषक की आवश्यकता होती है। कार्बनिक पदार्थों से इस प्रकार का पोषण किया जाता है।

1. खेत की मिट्टी में खाद को मिलाए

मिट्टी में खाद मिलाने से नाइट्रोजन ज्यादा मात्रा में होती है और खेत की मिट्टी के लिए एक पोषक तत्व की आश्यकता होती है। खाद को फावड़ा और टिलर के साथ खेत की मिट्टी में मिलाना ज्यदा जरूरत की आश्यकता होती है। ताकि ना की खाद को ऊपर से डालना। अगर आप अपने घर की खाद को इस्तेमाल कर सकते है तो या बाजार से खरीद सकते है।

2. गोबर का प्रयोग

अगर आप गाय या भेसो का गोबर अपनी खेतो की मिट्टी में इस्तेमाल कर रहे है तो आप खेतो की मिट्टी  अच्छी तरह से सुनिश्चित हो जाता है। गाय या भैंस की  गोबर में नाइट्रोजन प्रचुर मात्रा में पाई जाती है। ताकि पोधौ की हरी पत्तियां की जायदा विकाश करने में मदद करता है।

3. मिट्टी से नमक को हटाना

खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनने के लिए। मिट्टी की ऊपरी और निचले परत में नमक को पूरी तरह से हटाए बेगार ऊपरी वाली भूमि को उपजाऊ नहीं बनाया जा सकता है। स्क्रोपिन की ऊपरी वाली परत की खेतो की मिट्टी में पाई जाने वाली नमक को पूरी तरह से हटाने की काम करता है।

4. मिट्टी में पत्ते को मिलाना

रोग मुक्त मिट्टी के लिए कटे हुए पते को भी मिट्टी में मिला दे।और यह ध्यान रखे की कवक को शामिल ना करें।और कवक को खेतो की मिट्टी में मिलने से मिट्टी को खराब कर देता है। आप एक फावड़े से इन पत्तों को मिट्टी में मिला सकते हैं।और आप घास काटने वाली यंत्र से पते को कटिंग कर सकते हैं।

5. मिट्टी में कार्बन को मिलाना

खेतो की मिट्टी ने ज्यादा गीली या ज्यादा शुखी मिट्टी में कार्बनिक पदार्थ को मिलाने से खेतो की मिट्टी को खराब कर देता है।  इस तरीके से खेतो को मिट्टी में मिलाएं। जब तक मिट्टी भूरभुरी ना हो जाए।

मिट्टी को उपजाऊ बनने ले लिए हरी खाद की जरूरत पड़ती हैं। और सही समय पर फलीदरी पौधों को खड़ी फसल को ट्रेक्टर या देसी हल चलाकर और पटे चलाकर पोेधो को मिट्टी में दबा कर जो खाद बनता है। उसी को हरी खाद कहते हैं।

हरी खाद को बनने के लिए फसले।

  1. ढेचा,लोबिया,उरद,मूंग बर्सिम,और कुछ मुख्य फैसले हैं। जिसके प्रयोग हरी खाद बनने में प्रयोग किया जाता हैं। जैसे ढ़ेचा इनमें से अधिक आकंशित है।
  2. ढेचा की मुख्य किस्में अजीपिटका,एस रोस्ट्रोट तथा एस अक्वेलेट अपने तत्व खनिज कारण पर्टन उच्च नाइट्रोजन की मात्रा तथा अल्प बुर्छ अनुपात के कारण के बाद में बोई गई मुख्य फसल की उत्पादन करने प्रभाव पड़ता हैं।

हरी खाद को पौधों की मिट्टी में मिलाने कि आवस्था ।

हरी खाद में बोई गई फसल 55 से 60 दिनों के बाद खेतो में जुताई करके मिट्टी में मिलाकर तैयार किया जाता हैं।

  • इस अवस्था के लिए पौधों की लम्बाई वा हरी शुष्क का अधिकतम होता है। 55 से 60 दिनो तक की फसल आवस्था पर नरम या नाजुक है। जो आसानी से मिट्टी में काट कर मिला सकते हैं।
  • इस आवस्था में कार्बन नाइट्रोजन के आनुपात को कम करता हैं और पौधों रसीले या जैविक पदार्थ से भरे होते हैं। इस अवस्था पर नाइट्रोजन की मात्रा उपलब्ध बहुत ज्यादा होता हैं।
  • जैसे-जैसे हरी खाद के लिए लगाई गई फसल की अवस्था बढ़ती जाती है और इसमें कार्बन नाइट्रोजन की अनुपात में बढ़ जाता हैं। जीवाणु हरी खाद की पौधों को गलाने सड़ने के लिए मिट्टी की नाइट्रोजन की इस्तेमाल करते हैं। जिससे मिट्टी की स्थाई रूप से नाइट्रोजन की कमी हो जाती हैं।

हरी खाद बनने कि विधि।

  1. अप्रैल,माई के महीने में गेहूं की कटाई होने के बाद खेतो में सिंचाई कर ले। और खेतो में खड़ी पानी में 40 किलोग्राम की दर से ढेंचा को फैला ले ।
  2. जरूरत पड़ने पर 20 से 24 दिनो पर ढेंच की फसल हल्की सिंचाई कर ले ।
  3. 20 दिन की अवस्था पर 24 किलोमीटर की हल्की दर से यूरिया को खेतो में छिड़कने पर नोड्यूल बनने में सहायता करती हैं।
  4. 44 से 60 दिन अवस्था में हल चलाकर हरी खाद को खेतो में मिला दिया जाता हैं।इस तरह से लगभग 20 से 24 टन की प्रतिशत की दर से हरी खाद को उपलब्ध किया जाता हैं।
  5. जिससे नाइट्रोजन लगभग 60 या 70 किलोग्राम की प्रतिशत में प्राप्त होता हैं।जिससे मिट्टी में ढ़ेंचा के पौधों को गलाने सड़ाने से बैक्टीरिया द्वारा नियत की सभी नाइट्रोजन जैविक रूप से लंबे समय के लिए कार्बन के साथ मिट्टी को वापश मिल जाता हैं।

निष्कर्ष :- आशा करते है की आपको ये अच्छे से समझ में आ गया होगा की किस प्रकार से मट्टी को उपजाऊ बनाया जाता है। और खेतो की मट्टी में किस-किस चीजों  की जरुरत है। यदि आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी या दिक्कत है तो  हमारे कमेंट सेक्शन में कॉमेंट कर सकते है या दिए गए हमारे ईमेल से कांटेक्ट करे।

धन्यवाद!!!

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