गेहूं की जैविक खेती कैसे करें

गेहूं की जैविक खेती कैसे करें?

गेहूं की जैविक खेती का उत्पादन करने का मतलब यह है जिसमें फासले करने की प्रकृति का संसाधन है। जैसे ,गोबर की सड़ी खाद,हरी खाद ,फसलो को पदन पोस्न और रसायनिक, रोग अथवा  खरपतवार का भी नियंत्रित किया जाता है। जबकि गेहूं कि जैविक खेती में संश्लेषित रसायनिक किया जाता है, रसायनिक किए एईवाम रोगों को नियंत्रित किया जाता है और कारक तत्व का प्रयोग किया जाता है।

गेहूं भारत की एक प्रमुख फसल है:-

गेहूं की खेती भारत में सभी  राज्य में की जाता है जिसमें अधिक उत्पदन करने की राज्य के मैदानी क्षेत्रों में है, इसका कारण यह है कि मैदानी क्षेत्रों में गेहूं अधिकांश उपजाऊ किया जाता है इसकी सिचाई और उपजाऊ भूमि  किया जाता है। यदि यहां पर रसायनिक खादो आवम् उर्वरक की अपेक्षा की जेविक खादो का प्रयोग किया जाता है। तो भूमि की उर्वरता या जलधरण की छमता लंबे समय तक बनी रहती है। इसलिए गेहूं कि जैविक खेती से अधिक उपजाऊ होती हैं। और भारत के मैदानी क्षेत्रों में गेहूं की उत्पाद हेतु निम्नलिखित प्रकिया से होता हैं।

भूमि का चयन:-

गेहूं की जैविक खेती के लिए सभी प्रकार की भूमि में उपयुक्त रहता हैं।अच्छी उत्पाद करने के लिए बोआई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम रहता हैं। जिसमें पौधों बढ़ा और जाड़ों का विकास अच्छी तरह से होती  हैं।

खेत की तैयारी और खाद:-

गेहूं की जैविक खेती को जुताई करने से पहले 15 दिन पहले खेतो में 20 टन सड़ी गोबर खेतो में डाल देते है, फिर खेतो को अच्छी तरह से जुताई कर ले, जुताई करने के बाद खेतो में पटे चलाकर खेत को समतल कर ले और जब हमारा अच्छी तरह से खेत तेयार हो जाता है तब हमलोग का खेतो में बुवाई करके खेतो में खाद्य को फेला देते है, और बुआई करने के 20 दिन बाद खेतो में सिंचाई करने लगते है, इस तरीके से खेतो का तेयारी किया जाता है।

उन्नत की किस्में:-

गेहूं की उन्नत किस्में- किस्में का चुनाव क्षेत्रीय अनुकूल और बीजों को ध्यान रखकर किया जाता हैं। ताकि उत्पादन की क्षमता का लाभ ले सके। गेहूं के जेविक़ खेती के लिए किसानों को स्थानीय किस्में तथा देशों की बुआई को अपनाना चाहिए। सामान्य किसानों के लिए।गेहूं की उन्नत की किस्में को इस तरह से अपनाया हैं।

Read also: पौधों को उपजाऊ कैसे बनाये ? How to make plants fertile?

बीज की मात्रा और बीज की उपचार:-

बीज की मात्रा- गेहूं की जैविक खेती के लिए बीज की मात्रा का समय, मिटटी में नमी, बोआई का विधि एवम् किस्में के दानों पर निर्भर करता हैं। जल्दी से समय पर बुआई करने के लिए 100 से 120 किलोग्राम की प्रति हेकटेयर की बीज को प्राप्त करता हैं। दर से बुआई करने से 120 से 125 की किलोग्राम की प्रति से हेक्टेयर की बीज की मात्रा ठीक रहता हैं।

गेहूं की जैविक फसल हेतु मैदानी और पर्वत क्षेत्रों में अधिकांश कुडो में बुआई और टिकाव विधि से किया जाता है। टिकाव विधि से फसल को बढ़ाकर खरपतवार एवम् रोगों को नियंत्रित किया जाता हैं।ताकि दृष्टिकोण से उपयुक्त नहीं है।अता: बीज की बुआई की कतरो में किया जाता हैं।

बीज की उपचार:-

गेहूं की जैविक खेती के लिए बुआई पूर्व बीज की जैव उर्वरक से उपचारित है 1 किलोग्राम बीज की उपचार के लिए 5 से 10 ग्राम अजोटेबेक्तेर एवम् P, SB, की जीवाणु की खाद को प्राप्त करता है।

उपचार की विधि :-

गेहूं की जैविक खेती के लिए 3 से 5 घंटे की पूर्व की उपचार करता हैं। इसके लिए 1 किलोग्राम बीज को एक साफ बर्तन में रख ले। और बीजों में पानी छिड़क-कर के गीला कर ले । और इसमें 5 से 10 ग्राम P.S.B 5 या 10 ग्राम अजोटबेक्तेर पाउडर डालकर जीवाणु की खादो में प्रवत बीजों पर चढ़कर बीजों को छाया में सुखा लें। सूखने के बाद तुरंत बीजों को बुआई करने चालू कर दे। जीवाणु खाद को तेजी धूप में नहीं बुनना चाहिए।

बुआई की विधि:-

गेहूं के जैविक फसल के लिए बुआई के समय में खेतो में नमी की मात्रा आवशयक होना चाहिए। बुआई हल चलाकर कुड़ों को 4 या 5 सेंटीमीटर की गहराई तक होनी चाहिए। ताकि पंक्तियों की दूरी 19 से 23 सेंटीमीटर में रखे । अगर बुआई समय पर ना हो , तो पंक्तियों की दूरी 15 से 20 सेंटीमीटर में रखे। जिससे इकाई क्षेत्रों की संख्या बढ़ जाता हैं। और देर से बुआई करने में उपजाऊ में कम हो जाता हैं।

निराई गुड़ाई एवम् खरपतावर को रोकधाम करने के लिए:-

गेहूं की जैविक खेती की फासले से खरपतवर से मुक्त रखने के लिए। खरपतवार का नियंत्रित करने हेतु, गेहूं की जैविक खेती में दो बार निकाई- गुड़ाई करना होता हैं।पहला निकाई गुड़ाई बुआई करने के 30 से 40 दिन बाद एवम् दूसरा निकाई गुड़ाई फरवरी महीना में आवश्यक हो जाता हैं, क्योंकि तापमान बढ़ने पर फसल के साथ- साथ खरपतवार की विर्धी हो जाती है।

निकाई गुड़ाई करने से  खरपतवार को हटाने से फसल अच्छी तरह से बढ़ पाता है, और इस तरह  से छुटकारा मिलता है। और मिट्टी में उपयुक्त वायु संचार बना रहता है। गेहूं की जैविक खेती के लिए फसल में खरपतवार नियंत्रित रहता है, जैसे कई बातों पर निर्भर करता है, फसल का चक्र ,बुआई का समय, खेतो की तैयारी यादि।

निष्कर्ष :- आशा करते है की आपको अच्छे से समझ में आ गया होगा की किस प्रकार से गेहूँ की जैविक खेती की जाती है। और आपको गेहूँ उपजाने के लिए किस – किस चीजों की जरुरत है तथा किस -किस बातो का ध्यान रखना है। यदि आपको किसी प्रकार की परेशानी या  दिकत है तो हमें कमेंट कर के जरूर बताये या दिए गए हमारे ईमेल पे हमें कांटेक्ट करे।

धन्यवाद!!!!!

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *