झूम कृषि

झूम कृषि ( slash and burn farming )

झूम कृषि ( slash and burn farming )

झूम कृषि: प्राचीन काल में जब खेती करने के लिए जमींन की कमी पड़ जाती थी तो इंसान पेड़ो और पौधों को काट कर के उसी जगह पे लकडिओ को जला दिया करते थे जिससे की उसमे से निकलने वाले राख जमींन को उपजाऊ बना देते थे और वो जमींन खेती करने के लिए तैयार हो जाती थी। उसके बाद लोग उसी जगह का प्रयोग खेती करने के लिए किया करते थे। और इससे जमींन भी नहीं खराब होती थी क्यूंकि फिर उस जगहे  तक छोड़ दिया जाये तो वहां फिर से नए पेड़ और पौधे निकल आते थे। इस तरह के खेती आदिवासी लोग जिनका कोई ठिकाना नहीं होता है वो किया करते थे। आज यहाँ रहते है तो कल वो कही भी जा सकते है। इसलिए वे पेड़ो और पौधों को बर्बाद नहीं करते थे और अपना काम कर के अपना ठिकाना बदल  बिना पर्यवरण को नुक्सान पहुचाये। इस तरह की खेती अधिकांश पहाड़ी इलाको में किया जाता था।

इस प्रकार की खेती केवल भारत में ही नहीं बल्कि श्रीलंका, बांग्लादेश, अफ्रीका इत्यादि देशो में भी किया जाता है। और इसे अन्य देशो में मिल्पा कृषि के नाम से जाना जाता है।

स्थानान्तरण कृषि :-

वैसी कृषि जिसे अलग-अलग जगहों पे बदल-बदल कर के किया जाता है उसे स्थान्तरण कृषि कहते है। अर्थात जब कोई किसान या इंसान खेती करने के लिए जगह  को बनाता है और वहां झूम कृषि करता है, तो वो जब अपने ठिकाने को बदलता है तो उसे ही स्थान्तरण कृषि कहते है। ठीक इसी प्रकार से कृषि भारत के उत्तर-पूर्वी हिस्से में अभी भी हो रही है। जैसे कुछ राज्य निम्न प्रकार से है :- उड़ीशा, मध्य प्रदेश, केरल इत्यादि। और यहाँ इसे पोमान के नाम से जाना जाता है।

इस तरह के खेती में किसानो को कुछ जाएदा फायदा भी नहीं होता है क्यूंकि मिट्टी की उर्वरक कुछ ही समय के लिए बनी रहती है।  जिसकी वजह से खेती कुछ ही समय के लिए किया जा पाता है। इसलिए किसान अपने ठिकाने को बदलते रहते है और इसी पर्किर्या को स्थान्तरण कृषि कहते है। और जब किसान जमींन पे खेती कर के उसे छोड़ कर चले जाते है तो उस जमींन पे दोबारा से पेड़ और पौधे निकल आते है। लेकिन अब इस तरह के खेती को छोड़ कर के नए आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर के खेती किया जा रहा है।

कृषि :-

बनाये गए उर्वरक जमींन या भूमि में किसी मुख्य फसल या किसी तरह के खेती को जब किया जाता है तो उसे कृषि कहा जाता है। कृषि दो प्रकार के होते है। पहला तो किसी निश्चित भूमि पे किसी निश्चित फसल की खेती करना और दूसरा तो है की किसी एक ख़ास जगहे पे किसी प्रकार के जानवर या पशु का पालन करना भी कृषि के अंतर्गत ही आता है। ठीक इसी प्रकार से बहुत सारे किसान अपने जमींन पे खेती के साथ-साथ पशु पालन का काम करते है और अपने व्यपार को बढ़ावा दे रहे है। जब किसान कृषि करते है तो उसमे बहुत सारे कार्य किये जाते है और कृषि करना कोई आसान बात नहीं है, इसलिए कृषि करते समय बहुत से बातो का ध्यान रखना बहुत ही अवयस्क है। तो चलिए आपको हम बताते है की कृषि करने के लिए आपको किन-किन बातो का ध्यान रखना होगा और रखना चाहिए।

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कृषि करने के लिए आपके पास एक निश्चित भूमि का होना बहुत जरुरी है। और आपको कृषि करने के लिए कुछ सुविधाएं होनी बहुत ही जरुरी है जैसे :- सिचाई के लिए पानी, जुताई के लिए बैल या ट्रेक्टर, मजदुर, कटाई के लिए मशीने इत्यादि। इतना सब होने के बाद आपको कुछ पूंजी की भी जरुरत पड़ेगी, जिससे की आपको बीज और मजदूरी इत्यादि काम कर सके। इतना हो तो आप खेती करने के लिए तैयार है और आप कृषि कर सकते है। आपको ये निश्चित करना है की आपको किस चीज की खेती करनी है और उसके लिए आपको किन-किन चीजों की अवयस्कता होगी। और आप सब चीजों की सुविधा कर ले और करे। और कृषि कर के सालो में ढेर सारे मुनाफे कमाए साथ ही किसी प्रकार की कोई और जानकारी चाहिए तो आप हमारे वेबसाइट के और भी अन्य लेख पढ़ सकते है।

निष्कर्ष :- आशा करते है की आपको ये अच्छे से समझ में आ गया होगा की झूम कृषि किसे कहते है और इसे किस प्रकार से किया जाता है। और इस तरह के खेती किन लोगो द्वारा किया जाता है। यदि आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी या दिक्कत है तो आप हमें कमेंट कर सकते है या हमारे दिए गए ईमेल पे हमें कांटेक्ट कर सकते है।

धन्यवाद!!!!!

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