धान का सुरक्षित भण्डारण

धान का सुरक्षित भण्डारण।

धान का सुरक्षित भण्डारण।

भारत में अधिकतर इंसान खेती करते है और उसमे से उपजने वाले अनाज को जब सही तरीके से सुरक्छित नहीं किया जाता है, तो उसे किट, चूहे आदि फसलों को बर्बाद कर देते है। उपज का 10% अनाज प्रतेक साल बर्बाद हो जाता है और जिसकी वजह से किसान को तो नुक्सान होता ही है साथ में देश के अर्थवस्था पे भी असर पड़ता है। और इन सब का मुख्य कारन केवल और केवल सही तरीके से भण्डारण नहीं हो पाने की वजह से होता है। इसलिए आज हम आपको बताएंगे की किस प्रकार से धान और अन्य भी अनाजों को सही तरीके से कैसे भण्डारण किया जाता है और कैसे आप उसे सही से भंडारण कर सकते है।

धान की खेती :-

भारत में सबसे अधिक खपत होने वाले अनाज में से सबसे पहला है चावल जो की धान  को पीसने पे ही बनता है। और धान की खेती बहुत ही मुस्किलो से की जाती है। और इतनी मेहनत के बाद यदि उनके आनाज को सही तरीके से और सुरक्षित नहीं रखा जायेगा तो वो मेहनत तो बर्बाद है। इसलिए आज हम जानेगे की किस प्रकार से धान की खेती की जाती है और उसे कैसे सही से भण्डारण किया जाता है। धान की खेती के लिए आपको बहुत से मुस्किलो का सामना करना पड़ता है। धान को इंग्लिश में RICE कहा जाता है। धान को उपजने के लिए आपको मिट्टी को कीचड़ में बदलना पड़ेगा उसके बाद आप धान की खेती कर सकते है। कीचड़ करने के बाद उसमे धान के बीजो से निकले पौधे हो रोपा जाता है। और उसके बाद खेतो को छोड़ दिया जाता है और इसके बिच में बहुत सारी पर्किर्या है जो की किये जाते है। यदि आपको और भी  डिटेल चाइये तो आप हमारे दूसरे लेख को पढ़ सकते है। फिर जब फसल तैयार हो जाता है तो फसल को काट लिया जाता है।

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धान की कुटाई :-

जब फसल तैयार हो जाते है तो उन्हें खेतो से काट कर के खलिहान में लाया जाता है। वहां पे फसलों में लगे फल मतलब धान और फसल को अलग-अलग करते है। उसे अलग करने के बाद उन्हें बोर में भर कर के घर या उसकी कुटाई के लिए उसे मिल के दूकान पे ले जाया जाता है। वहां धान के ऊपर लगे कवर अर्थात भूसे और चावल को अलग- अलग किया जाता है। उसके बाद धान चावल में बदल जाते है और वे खाने के प्रयोग में आ जाते है। लेकिन किसान बहुत जाएदा की संख्या में खेती करते है जिसे वे पुरे सालो भर में नहीं खा पाएंगे, इसलिए वे उन्हें बेच देते है। वे उन्हें दो तरह से बेचते है पहला तो केवल फसल और धान को अलग कर के धान को ही बेच देना और दूसरा धान की कुटाई के बाद उसे चावल बना के बेचना। इन दोनों में किसानो को कुछ जाएदा फायदा नहीं होता है।

धान का भण्डारण :-

जब धान को बेच दिया जाता है तो खरीदार उसे अपने गोदाम में ले जाता है और उसे स्टॉक कर के जमा कर के रखता है ताकि जब बाजार में चावल की कमी होगी तो उसे वो अच्छे दामों में बेचेगा और मुनाफा कमायेगा। लेकिन जब उन धान को गोदाम में रखा जाता है, तो बहुत सारे प्रकार के खतरे होते है। जैसे :- किट-पतंग, चूहे, कीड़े, किरी, इत्यादि जैसे खतरे से बचने पड़ते है धानो को उसके बाद उसे बाजार में अधिक कीमत पर बेचा जाता है।

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धान के भण्डारण के कुछ सुझाव :-

  • कटाई करने के बाद जब फसल और धान को अलग कर लिया जाये तो धान को धुप में सूखा लेना चाहिए।
  • धान को इसलिए सुखाया जाता है क्यूंकि गीले धान गोदाम में रखने पर धानो में फुफड़ी लग जाते है और धान सड़ भी सकते है।
  • बोर में धान को रखने से पहले देख ले की बोर साफ़ हो और इनमे किसी प्रकार के कोई कीड़े ना हों।
  • बोर को ऐसे जगहे पे रखे जहाँ नमी न पहुंच पाए और जहाँ भी रखी जाये उसके निचे पलास्टिक को बज्चा दे।
  • बोर को दीवारों या छत्तो से सटा कर के नहीं रखना चाहिए।
  • धान को गोदाम में रखने से पहले गोदाम की मरमत करवा ले ताकि वहां अंदर नमी या पानी ना पहुंच पाए।
  • दिवार आदि के उखड़े प्लास्टर एवं ईंटों के बीच कीड़े छिपे हो सकते हैं, इसलिए उनकी मरम्मत करके अच्छी तरह लिपाई कर देनी चाहिए|
  • खिड़कियों या दीवारों में से अंदर हवा और पानी अंदर की और नहीं जाने चाहिए।
  • धान के गोदाम में कीटनाशक दवाएं खाद इत्यादि नहीं रखने चाहिए, क्योंकि ये उसे प्रभावित कर खराब कर सकते हैं|
  • गोदाम में धान रखने से पहले मेलाथियान घोल नमक कीटनाशक का छिड़काव करना चाहिए।
  • धान को सीमेंट, कांक्रीट, एल्यूमिनियम या धातु की बनी कोठियों में सुखाकर रखना चाहिए, इससे अनाज चूहों, पक्षियों, कीड़े, फफूदी तथा नमी से सुरक्षित रहता है, धातु की बनी कोठियों में रखे जाने वाले अनाज की पौष्टिकता बनी रहती हैं|
  • जरुरत पड़ने पे धान को वहां रखा जा सके और निकाला जा सके ऐसे स्थान पे रखना चाहिए।

निष्कर्ष :- आशा करते है की आपको ये अच्छे से समझ में आ गया होगा की किस  प्रकार से धान की खेती की जाती है और उसका भण्डारण किया जाता है। यदि आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी या दिक्कत है तो आप हमें कमेंट कर सकते है या दिए गए हमरे ईमेल पे हमें कांटेक्ट कर सकते है।

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