मक्के की खेती कैसे करे

मक्के की खेती कैसे करे ? How to cultivate maize?

मक्के की खेती कैसे करे ?

मक्का एक मुख्य खाद फसल में से एक है, जो भुट्टे के नाम से भी जाना जाता है। मक्के को मैदानी इलाके में उगाया जाता है और साथ ही पहाड़ी इलाको में भी इसकी खेती की जाती है। मक्का मोठे अजाजो के अंदर आता है। और इसे कोई भी जमींन में उगाया जा सकता है, इसके लिए मुख्य भूमि दोमट मिटटी होती है। क्यूंकि ये दोमट मिटटी में अच्छे से बड़े होते है और बड़ी-बड़ी फैसले होते है।

मक्के को बरसात के दिनों अर्थात वर्षा के दिनों में उगाया जाता है, क्यूंकि मक्के को बढ़ने के लिए पानी की आवयश्कता जाएदा मात्रा में होती है। लेकिन जहाँ सिचाई की सुविधा हो वहां भी मक्के की खेती की जा सकती है। मक्का फसल कार्बोहाइड्रेट की एक बहुत अच्छा स्रोत माना जाता है। मक्का मनुष्य के आहार के साथ-साथ जानवरो और पसुओ के आहार के काम आता है। मक्के को लोग पीस कर के उसे रोटी बना कर के भी कहते है और जब वो ताजा होता है तो उसे लोग भुट्टे के रूप में पक्का कर के खाते है। भारत में उगने वाले मक्के का 65% मुर्गे और बत्तकों के आहार के रूप में किया जाने लगा है। और सबसे महत्वपूर्ण मक्के का उपयोग सिनेमाघरों में पॉपकॉर्न बनाने में किया जाता है।

भूमि और जलवायु :-

मक्के की खेती करने के लिए समतल भूमि की जरुरत होती है। और जमींन दोमट मिट्टी की हो तो वो और भी उत्त्तम होगा। साथ ही मक्के को उपजने के लिए ठन्डे और हलके वर्षा की जरुरत होती है। साथ ही जिस जमींन में आपने मक्के को रोपा है उसमे से पानी के भर होने की जगह होनी चाहिए वर्ण मक्के सड़ जायेंगे और सारी फसल बर्बाद हो जाएगी।

भूमि की तैयारी:-

जमीं जब सुखी हो तो उसे ट्रेक्टर या बैल की मदद से जोत ले और और एक-दो दिनों के लिए छोड़ दे। उसके बाद फिर से एक बार उसे जोत ले और पट्टे की मदद से समतल या बराबर कर ले। और बराबर करने के बाद उसमे सीधी-सीधी धराये मतलब लाइन बना ले कोड़ी या कुदारी की मदद से।

बीजो की मात्रा:-

बाजार से जा कर के बीज भण्डार या दूकान से मक्के की बीजो को खरीद के ले आये। ध्यान रखे की बीज जाएदा पुराने नहीं होने चाहिए। और बीज ताजा और नए होने चाहिए क्यूंकि पुराने बीजो में कीड़े लग जाते है और वे चीन जाते है। जिससे की मक्के की फसल अच्छे से बड़े नहीं होंगे और खेती में नुक्सान हो जायेगा।

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बुआई का समय:-

बीजो को बाजार से लाने के बाद उन्हें धू ले और खेत में ले आये क्यूंकि भूमि भी अब तैयार है और बीज भी। इतना करने के बाद जमींन में जो आपने धराये मतलब लाइन बनाई थी उसमे हर 2cm की दुरी पे मक्के के बीजो को अच्छे से बैठा दे ताकि वे बढ़ पाए। अब आपको फिर से ट्रेक्टर या बैल की मदद से पट्टे को ले कर के भूमि को समतल कर देना है, ताकि बीज जमींन के अंदर चले जाये और भूमि भी समतल हो जाये।

कोडाई का समय:-

जब बीज से निकल कर के पौधे थोड़े-थोड़े बड़े हो जाये उसके बाद उसे कोड़ने की जरुरत पड़ती है। इसलिए उसे कोड़ा जाता है ताकि उनके जड़ो को हवा और पानी मिल सके और वे अच्छे से बढ़ सके। आपको सावधानी से उनके जड़ो के बगल-बगल से कोडना है और पौधे कोड़ने के बाद एक दिन के लिए छोड़ देना है ताकि उन्हें अच्छे से हवा और पानी मिल सके।

सिचाई का समय:-

सिचाई का मतलब है की पौधे में पानी देना और यदि आपने मक्के को वर्षा वाले दिनों में रोपा है, तो आपको सिचाई करने की जरुरत नहीं है और यदि अपने जर्मी और जाड़े के दिनों में मक्के की खेती करने का सोचा है, तो आपको सिचाई भी करने पड़ेगी साथ ही साथ उसमे समय-समय पे पानी देते रेहना होगा। और पानी के निकलने की सुविधा  भी होनी चाहिए आपके खेत में ताकि बीज सड़े-गले नहीं।

कटाई का समय:-

जब फसल तैयार हो जाये और उसमे फल भी तैयार हो जाये और आपको लगे की फसल अब कतई के लिए तैयार है तो आपको उसे काटना होगा और उसके फल मतलब मक्के की बाल को फसल से अलग कर के रखना होगा। इतना सब करने के बाद आप उसे बाजार में बेच भी सकते है या अपने खाने का उपयोग में भी ला सकते है। और यदि आपको उसे भविष्य में उसका उपयोग करना है तो आप उसे सूखा कर के बाजार में ले जा कर के मिल से पिसवा कर के संग्रह कर के रख ले सकते है।

निष्कर्ष:- आशा करते है की आपको ये अच्छे  से समझ में आ गया होगा की किस प्रकार से मक्के की खेती की जाती है और आपको मक्के की खेती करने के लिए किन-किन बातो का ध्यान रखना होगा। यदि आपको किसी प्रकार की कोई परेशानी या दिक्कत है तो आप हमें कमेंट कर सकते है या दिए गए हमारे ईमेल से हमें कॉनटैक्ट कर सकते है।

धन्यवाद!!!     

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