February 27, 2021

ईमानदारी का इनाम – Imandari ka Inaam

एक गांव में रामलाल नाम का एक व्यक्ति रहता था। वह घर को रंगने का काम करता था। वह अपना काम बड़ी ईमानदारी और मेहनत से करता था। मेहनत करने के बाद भी बहुत कम कमा पाता था।

जिससे की उसकी केवल दो समय की रोटी का जुगाड़ ही होता था। वह ज्यादा काम करना चाहता था। एक दिन गांव के जमींदार ने रामलाल को बुलाया। रामलाल जमींदार के पास गया।

जमींदार ने कहा की मेरे पास एक नांव है तुमको उस पर रंग करना है और उसको रंग आज के दिन ही करना है। रामलाल ने जमींदार को बोला की वह रंग कर देगा। जमींदार ने रामलाल से रंग करने का रेट पूछा तो रामलाल ने बोला की वह रंग करने का 1500 रूपए लेगा।

इसके बाद जमींदार ने रामलाल को नदी के किनारे खड़ी नाव दिखा दी। रामलाल अपने घर से रंग लाकर बड़ी सफाई के साथ उसमे रंग करने लगा। वह जब रंग कर रहा था तो उसको नाव में एक छेद नज़र आया।

उसने सोचा यदि मै इसके ऊपर केवल रंग कर दूंगा तो यह नाव डूब जाएगी। इसलिए पहले उसने उस छेद को भरा फिर उस पर रंग किया। नाव के रंग का काम पूरा होने पर वह जमींदार को नाव दिखाने लाया।

यह भी पढ़े :- खर्चीली सास – Kharchili Sas

जमींदार ने नाव को देखने के बाद पैसे अगले दिन देने की बात की। जिसके बाद रामलाल चला गया। अगले दिन जमींदारके बीवी बच्चे उस नाव में बैठकर नदी के पार घूमने के लिए चले गए।

शाम को जब जमींदार का नौकर लौटा तो उसने घर के बाकी सदस्यों को घर में न देखकर जमींदार से पूछा तो जमींदार ने बताया की वह नाव में बैठकर नदी के पार घूमने गए है। नौकर ने जमींदार को बताया की उस नाव में तो छेद था।

जमींदार इस बात से बहुत परेशान हो गया। इसके कुछ देर के बाद ही जमींदार की बीवी और बच्चे घर सकुशल लौट आये। उनको पता चल चूका था की रामलाल ने नाव में रंग करते समय उस छेद को भर दिया।

इसके बाद जब रामलाल अपने पैसे लेने आया तो जमींदार ने उसको पैसे दिए। रामलाल ने गिने तो उसमे 6000 रूपए थे। रामलाल ने कहा आपने गलती से मुझे ज़्यादा रूपए दे दिए है।

रामलाल ने कहा की नहीं यह तुम्हारे काम का इनाम है जो तुमने किया है। तुमने नाव में रंग करते समय जो छेद भरा था। उसकी वजह से मेरे परिवार की जान बच गयी। रामलाल पैसे लेकर घर चला गया। वह बहुत खुश था।

Moral of the story

सीख : ईमानदारी और मेहनत से काम करने का नतीजा हमेशा अच्छा ही होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

two × four =